जैतपुर में बाढ़ पीड़ित परिवारों के लिए राहत कैंप
Relief camp for flood-affected families in Jaitpur
जब लोगों के पास रहने की जगह नहीं थी, तब भोजन ने दिया सहारा
जैतपुर में आई भीषण बाढ़ के दौरान कई परिवारों को अपने घर छोड़कर मंदिरों, मस्जिदों, स्कूलों और खुले स्थानों में शरण लेनी पड़ी। इस कठिन समय में हमने महसूस किया कि विस्थापित परिवारों के लिए रोज़ाना खुद से भोजन तैयार करना लगभग असंभव हो गया है – न चूल्हा बचा था, न ही रसोई की सुविधा।
इसी जरूरत को समझते हुए हमने जैतपुर में एक सामुदायिक रसोई (कम्युनिटी किचन) शुरू किया, ताकि कोई भी बच्चा, महिला या बुज़ुर्ग भूखा न रहे।
सुबह की राहत – सूखी खाद्य सामग्री का वितरण
हर सुबह जरूरतमंद परिवारों के बीच सूखी खाद्य सामग्री बाँटी गई, जिसमें:
- केले
- बिस्किट
- दूध
- ब्रेड
- चना
इस वितरण के दौरान विशेष ध्यान छोटे बच्चों, महिलाओं, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं पर दिया गया, ताकि उन्हें दिन की शुरुआत में ही पोषण और ऊर्जा मिल सके।
दोपहर और रात का पका हुआ भोजन – सामुदायिक रसोई से
सामुदायिक रसोई में रोज़ दोपहर और रात का ताज़ा पका हुआ भोजन तैयार किया गया। अलग–अलग दिनों में:
- खिचड़ी
- पुलाव
- चावल और कढ़ी
जैसा सरल, सुपाच्य और पौष्टिक भोजन बनाया गया, ताकि लंबे समय से तनाव और थकान झेल रहे लोगों के शरीर को ताकत मिल सके।
सेवा के साथ–साथ सम्मान का एहसास
यह अभियान केवल भोजन बाँटने तक सीमित नहीं था। कोशिश रही कि हर व्यक्ति को सम्मान, सुरक्षा और अपनापन
यह पूरी पहल इस बात की जीवंत मिसाल बनी कि आपदा की घड़ी में इंसानियत ही सबसे बड़ी ताकत होती है। जब लोग बेघर और असुरक्षित महसूस कर रहे थे, तब सामुदायिक रसोई ने उन्हें केवल भोजन नहीं, बल्कि उम्मीद भी दी।
